जब जीर्ण शीर्ण होता है तन, जब छिन्न भिन्न होता है मन, हम मौत को गले लगाते हैं, एक नया जीवन पाने को।

मृत्यु अंत नहीं जीवन का यह तो हमारी विश्रान्ति है नयी दुनिया में प्रवेश से मिलती मन को शान्ति है।

रंग मंच सा है हमारा संसार मिलता है विजय या कभी हार इस क्षणभंगुर दुनियाँ में पाते हैं हम दुत्कार या प्यार।

अनेक किरदारों को निभाकर ही विषय से इस अर्श से जाते हैं। मृत्यु के बाद जग निर्णय लेगा हम क्या खोते या पाते हैं।

सुकर्म करो तो यश पाओगे यह तो यहाँ की रीति है। कर्म में जीवन प्रबल है सबका बिना स्वार्थ नहीं किसी की प्रीति है।

यहाँ तो कर्म बदल जाते हैं कभी कभी धर्म बदल जाते हैं। शानदार जीवन जीने के लिए उनके मर्म बदल जाते हैं।

बार बार जन्म लेना पड़ता हमें हर बार मौत के गले लगाते हम, यह खेल है सिर्फ कुदरत का क्या नहीं समझ पाते हम।

चलती रहेगी यह आँख मिचौली जब तक है माया का बंधन। हर किसी को छोड़नी पड़ती है धरती मृत्यु तो है जीवन का आलिंगन।

Courtesy: Dr Sujiv Sanyal ( from Bakhri Bazar, Begusarai, Bihar) wrote this on 10th Sept 2019. He is an avid reader and a known poet and Popularly known as Sanyal Dr saab in the region.

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *